चीन की दोस्ती पर इतराने वाले तुर्की को चीन ने ही दे दिया गच्चा

जैसा चाहिए वैसा चीन का सामान ना चीन पर भरोसा किया जा सकता है और ना ही चीन के किसी सामान पर और यही कहावत चीन के लिए पूरी दुनिया पर मशहूर है लेकिन अपने देश में घातक कोरोनावायरस पालने वाले और अपने देश से दुनिया में वायरस को फैलाने वाले चीन पर तुर्की ने भरोसा क्या किया उल्टा तुर्की के लिए इतना भारी पड़ गया है.

कि अब समझ नहीं आ रहा है कि वह करे तो क्या करें वहीं चीन पर अब इस मामले पर बोलती बंद हो चुकी है आज हम अपने इस आर्टिकल में उसी सामान को दिखाने जा रहे हैं जिसे तुर्की में जान के लाले पड़ चुके हैं.

 

 चीन की दोस्ती पर इतराने वाले तुर्की को चीन ने ही दे दिया गच्चा

दोस्तों चीन के वहां से चले वायरस ने पूरी दुनिया पर कोहराम मचा दिया है और एक बार फिर से पूरी दुनिया में कोरोना कि मामले की रफ्तार देखने को मिल रही है ऐसे में कई देशों मैं अपने अपने यहां वैक्सीन बना ली है इसमें से एक देश भारत भी है जिसने कई देशों तक फ्री वैक्सीन की सप्लाई की है.

लेकिन चीन ने इस आपदा में भी मुनाफा ढूंढा है पहले चीन ने पाकिस्तान को ठगा उसने मास्क के नाम पर अंडरवियर के मस्त बना कर भेज दिए वहीं चीन के दोस्ती पर इतराने वाले तुर्की को भी चीन ने नहीं बख्शा है और ऐसा झटका दिया है कि तुर्की में हड़कंप मच चुका है दरअसल कोरोनावायरस जो वैक्सीन चीन ने बनाई है.

वह तुर्की को सप्लाई की गई है लेकिन चीन की कोरोनावायरस वैक्सीन पर भरोसा करना तुर्की को भारी पड़ता दिखाई दे रहा है अगर 24 घंटे की बात की जाए तो पिछले 24 घंटे में तुर्की में कोरोनावायरस 59000 मामले सामने आए हैं जिसके बाद पूरे तुर्की में हड़कंप मच गया है और वही देश के कई इलाकों में सक्त lock-down लगाने की तैयारी की जा रही है.

दरअसल तुर्की ने पिछले साल फरवरी की शुरुआत में चीनी फनी सुनो वैक्स से वैक्सीन के 50 मिलियन खोरा खरीदने का अनुबंध किया था वह कंपनी कोरोनावैक के नाम से वैक्सीन बनाती है जिसका प्रभाव कई देशों में अलग-अलग है तुर्की को चीन का दोस्त माना जाता है हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद तुर्की.

और चीन के रिश्ते काफी मजबूत हो गए हैं वही के राष्ट्रपति ने इन दिनों चीन के पाकिस्तान की सहायता से पूरी दुनिया में मुसलमान का मसीहा बनने की कोशिश में जुटे हैं यही कारण रहा कि 50 फ़ीसदी से भी कम प्रभाव के बावजूद उन्होंने चीनी वैक्सीन को मंजूरी दे दी है|

 

सस्ती वैक्सीन के नाम पर चिन्ह लगा रहा कई देशों को चुना

दरअसल दोस्तों चीन जाना है इसलिए जाता है क्योंकि वह किसी भी सामान की कॉपी और उसे सस्ते में उपलब्ध करवा देता है लेकिन वह सामान कितने दिन चलेगा यह चीन भी खुद नहीं बता पाता ऐसा ही चीन की वैक्सीन के साथ हो रहा है जो सस्ती तो है ही साथ ही इस्तेमाल करने में भी आसान है.

और यही वजह है चीन की वैक्सीन दुनिया भर में कम से कम 53 देशों में लगाई जा रही हैं इनमें से कई दक्षिण अमेरिका अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में विकासशील राष्ट्र शामिल हैं दरअसल चीन की वैक्सीन स्टोर करने में काफी आसान है और यह गरीब देशों के लिए आदर्श वैक्सीन है.

जिनके पास माइनस 20 डिग्री से ज्यादा के तापमान पर वैक्सीन स्टोर करने की सुविधा नहीं है लेकिन लगातार चीन की इस कोरोनावैक्सीन  को लेकर शिकायतें आ रही हैं जिसके बाद चीन के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने खुद ही स्वीकार किया है कि उनकी कोरोनावैक्सीन  की प्रभावशीलता काफी कम है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैक्सीन चलते इसका असर काफी कम है इसे बढ़ाने के लिए चीनी वैक्सीन ने साथ में बातचीत की जा रही है ब्रिटेन के शीर्ष वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है की चीन की कोविड-19 वैक्सीन पर भरोसा करने वाले देशों में संक्रमण की रफ्तार तेज होने का खतरा है वैज्ञानिकों ने दावा किया है.

कि दुनिया को दक्षिण अमेरिकी देश चिली से सबक लेना चाहिए इस देश में एक सफल कोरोना वैक्सीन एक्शन प्रोग्राम के बाद ही चीन में बने जी के बाद जीके वायरस का समर्थन चीन की कोरोनावायरस वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है इसे चीन की दिग्गज  फार्मा कंपनी कोनो वैक्स  ने बनाया है|

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