धरती पर ऑक्सीजन कैसे आई जानिए पूरी सच्चाई हिंदी में

धरती पर ऑक्सीजन  दोस्तों आप सभी लोगो को पता होगा की एक इंसान के जिन्दगी के लिए सबसे जरुरी चीज़ होती है रोटी, कपड़ा, और मकान लेकिन दोस्तों क्या आप लोगो को पता है की इससे भी जरुरी एक चीज़ है जिसके बिना इंसान का जिन्दा रहना नामुमकिन है.

 

इसके बिना इंशान तो क्या हमारी ये धरती भी जिन्दा नहीं रहेगी न पेड़ पौधे होंगे और न ही कोई जानवर दरअसल वो जरुरी चीज़ है ऑक्सीजन जिसके बिना एक पल भी जिन्दा रह पाना मुश्किल है इतना जानते हुए भी हम वही काम करते है जो हमे नहीं करना चाहिए.

 

पेड़ पौधों को लगातार काटना इंसान की फितरत बन चुकी है सबकुछ जान कर भी हम अंजान बन सच्चाई से मुह मोड़ रहे हैं जरा अंदाजा लगाइए की अगर धरती पर से ऑक्सीजन अगर गायब हो जाए तो क्या होगा.

 

जैसे ही धरती से ऑक्सीजन गायब होगी पृथ्वी का वातावरण बेहद ठंढा हो जाएगा ओजोन की मात्रा जब अधि हो जायेगी तो उस दौरान जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे होंगे वो सभी पलक झपकते ही Sun Burn से झुलस जायेंगे.

 

आसमान का रंग नीला कम और काला ज्यादा होगा चारो ओर अँधेरा सा छा जाएगा अरबो साल पहले जब पृथ्वी पर ऑक्सीजन नहीं थी तो पृथ्वी का वातावरण आज के मुकाबले कुछ अलग सा था.

 

दोस्तों शायद आप लोगो को पता भी नहीं होगा की अरबो साल पहले पृथ्वी पर ऑक्सीजन नाम की कोई चीज़ नहीं थी अब आप लोगो के मन में सवाल उठ रहा होगा की आखिर धरती पर ऑक्सीजन कब पैदा हुई.

 

और आखिर कैसे ऑक्सीजन की मात्रा धरती पर बढती गयी दोस्तों in सभी सवालों के जवाब आज हम आप लोगो को देंगे|

 

2.4 अरब साल पहले धरती पर जमा हुई ऑक्सीजन

दरअसल एक शोध में इसका खुलासा हुआ है की धरती को जिन्दा रहने के लिए कितना साल लगे पृथ्वी पर ऑक्सीजन 2.4 अरब साल पहले जमा होनी सुरु हुई थी ये एक ग्रेट Ocsidation इवेंट दौरान हुआ था.

 

ये एक लम्बे समय से पहेली है की जब भूकर्भी संकेतो से ये पता चल रहा था की 2.4 अरब साल के भी करोड़ो साल पहले सुरवाती बेक्टीरिया फोटो संथिसिस से ऑक्सीजन वायुमंडल में छोड़ रहे थे फिर वो ऑक्सीजन कहा चली गयी.

 

अब इस बात का खुलासा नेचर कम्युनिकेशन प्रकाशित में व्होशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोध में हुआ है इस शोध के लेखक की माने तो आंकड़े दर्शाते है है की पृथ्वी की मेटल के विकास का हमारे वायुमंडल के विकास से सम्बन्ध हो सकता है और जीवन के विकास से भी,

 

ये अध्यन वायुमंडल में ऑक्सीजन के पैदा होने की क्लासिक हैपोथिस को फिर से जगा रहा है पृथ्वी पर पहली बार ऑक्सीजन का बनना कब सुरु हुआ इसे ले कर अरसे तक वैज्ञानिकों के बिच कुछ मदभेद रहे.

 

साल 2018 में इसको ले कर नई जानकारी सामने आयी जिसमे कई दावो को गलत साबित कर दिया गया दरअसल लन्दन में हुई इस रिसर्च के हिसाब से करीब 3.6 अरब साल पहले प्रकाश संश्लेषण के जरिये कई शुच्म जीवो में ऑक्सीजन का निर्माण सुरु कर दिया था.

 

पृथ्वी पर जीवन की सुरुआत से जुडी ये नई जानकारी काफी अहम् मानी जा रही है जब की व्होशिंगटन यूनिवर्सिटी के नये शोध का आधार साल 2019 में किया गया एक शोध है जिसमे पता चला था की पहले पृथ्वी का मेटेल कमोक्सिग्रेट था.

 

या उसमे ऐसे पदार्थो की भरमार थी जो ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करते हो इस शोध में 3.55 अरब साल पुराने आग्नेय शैलो का अध्यन किया गया था दक्षिण अमेरिका की और कैनेडा की कुछ खोज से नमूने इकठ्ठा किये गये थे.

 

उस अध्यन के सहलेखक रॉबर्ट निक्लास, इगोर्पुस्टेल, और एरिलयल ऐन्बल इस ताज़ा अध्यन के भी सहलेखक हैं और उन्होंने इसका अध्यन किया है की मेटेल में किस प्रकार उन ज्वालामुखी गैसों को प्रभावित किया जो सतह तक आई.

 

नये शोध के मुताबिक मेटेल पृथ्वी की उपरी सतह क्रस्ट के ठीक निचे एक चट्टान की नरम परत है ये परत ज्वालामुखी से निकलने वाली पिघली चट्टानों और गैसों को नियंत्रित करती है पुराने कमोक्सिग्रेट मेटेल में ज्यादा मात्रा में हायड्रोजन निकाली होगी.

2019 के शोध पत्र में बताया गया था की धीरे धीरे हमारी मेटेल की परत 3.55 अरब साल पहले तक ओक्सिग्रित होती गयी थी अध्यन में कुछ अवसादी शैलो का भी अध्यन किया गया था जिनमे ये पाया गया.

 

की सूक्ष्म जीवो से निकली ऑक्सीजन 2.5 अरब साल पहले ज्वाला मुखी में खपने वाली ऑक्सीजन से ज्यादा हो गयी और वायुमंडल में जमा होने लगी शोधकर्ताओं का कहना है की ज्वालामुखी के ऐसे प्रोटोसिन्थेसिस प्रक्रिया सुरु होने के बाद भी करोड़ो सालों तक वायुमंडल के ऑक्सीजन को खाती रही होंगी.

 

लेकिन फिर मेटेल का खुद भी ऑक्सीकरण हो गया और फिर वायुमंडल में ज्वालामुखी से इस तरह की गैसों का निकलना ही कम हो गया जो ओक्सिग्रित हो सकती थी तभी से वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा अब बढ़ने लगी यानि करीब 2.5 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर ऑक्सीजन धीरे धीरे बढ़ने लगी.

 

अब सवाल यह उठता है की जब पृथ्वी पर पहले से ही कुछ ऑक्सीजन मौजूद थी जिसकी वजह से कुछ जीव जंतु जिंदा थे वो ऑक्सीजन आखिर गायब कैसे होने लगी.

 

वैज्ञानिको ने अपने शोध में इस बात का भी खुलासा किया है और ऑक्सीजन के ख़त्म होने के पीछे की वजह एक ज्वालामुखी को बताया गया है|

 

वायुमंडल से ज्वालामुखी की वजह से ख़त्म हुई ऑक्सीजन  

वैज्ञानिको की माने तो ज्वालामुखी आज के मुकाबले तब ज्यादा सक्रीय था जब पृथ्वी पर केवल सूक्ष्म जीव चारो ओर फैले हुए थे ज्वालामुखी के फूटने से मैग्मा, जो पिघली और कम पिघली चट्टानों का मिश्रण होता है धरती पर फैलने लगा.

 

और उसके साथ ही कई गैसे भी निकल कर आई जब ज्वालामुखी नहीं फट रहा था तब उन गैसों का ऑक्सीकरण हो गया यानि वो हवा में मौजूद ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया कर गयीं.

 

ऑक्सीजन हमेशा से ही इलेक्ट्रान की भूखी होती है जब भी उसे इलेक्ट्रान देने वाला अणु मिल जाता है वो उससे प्रतिक्रिया कर नया अणु बना लेती है इसे ही ऑक्सीकरण कहते है.

 

ज्वालामुखी से निकलने वाली बड़ी मात्रा में हाइड्रोजन में भी ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया कर वायुमंडल से ऑक्सीजन को पूरी तरह हटा दिया होगा.

 

दोस्तों आज की इस लेख से आप लोगो ने यह जाना की कैसे ऑक्सीजन का निर्माण हुआ और कितने साल पहले हुआ और साथ ही यह भी जाना की ऑक्सीजन के बनने की प्रक्रिया क्या होती है.

उम्मीद है की इस लेख से आप लोगो को कुछ नया जानने को मिला होगा अगर पोस्ट अच्छी लगी हो तो हमे कमेंट कर के जरुर बतायें मिलते है ऐसी ही किसी और पोस्ट में तब तक के किये नमस्कार !

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