अकबर कौन था पूरी जानकारी हिंदी में

जलालुदीन मुहम्मद अकबर 1542 में इनका जन्म हुआ इनके पिता का नाम हुमायु था और इनके बेटे का नाम जहाँगीर था कहा जाता है की जलालुदीन मुहम्मद अकबर सबसे सफल राजा रहे पुरे भारत में ,अकबर कौन था|

 

जब यह छोटे थे तो इनके पिता इनके साथ नहीं रहते थे और इनकी माँ भी इनके साथ नहीं थी इसके कारण इन्होने काफी कठिनाइयां महशुस की आप को बता दे की अकबर बचपन से ही बहोत ताकतवर थे और तेज़ दिमाक भी था इनको जिस भी चीज़ ज्ञान दिया जाता था ये उसे बड़ी तेज़ी के साथ सीख लेते थे.

 

 वैसे तो अकबर बचपन से ही अनपण थे इन्होने बचपन से किसी प्रकार की कोई पड़ी नहीं की थी बस इनको यह ही बताया जाता था की एक अच्छा और ताकतवर राजा कैसे बनते है लेकिन इसके बावजूद भी इन्होने 24 हजार किताबो की एक बड़ी Library अपने महल में बनवा रखी थी.

 

अकबर कौन था  इनका मानना था की मुझको पड़ना नहीं आता तो कोई बात नहीं लेकिन मै उस काम पर फोकास करूंगा जिस काम में कोई और फोकस नहीं कर पाता है पड़ाने के लिए इन्होने अपने पास Techers रखे रोज शाम को किताब खोल खोल कर इन्हें पडाते रहे लगभग 24 हजार किताबे Diverd subsect पर इन्होने पड़ डाली,

 

अपने शासन काल के दौरान इन्होने सबसे ज्यादा विभिन्न हिस्सों को इन्होने अलग अलग Strategy के साथ जीत के दिखाया सुरुआत इन्होने राजपूतो के राजस्थान आमेर से करी अमेर के राजा को तो ये बिना लड़े जीत गये और बाद में तो आप को पता ही होगा की अमेर के राजा की पुत्री जोधा से इनका विवाह भी हुआ.

 

इनकी पूरी नज़र राजस्थान और गुजरात में थी क्यू की वो व्यापर मार्ग से समुद्र को बिल्ड करता था inport और export में, इनके दिमाक में एक दिन यह ख्याल आया की राजस्थान में सबसे जरुरी जगह है चितोड़ और सबसे pawerfull भी और उस वक्त हमारे राजपूत भी बड़े pawerfull हुआ करते थे.

 

चित्तोड़ को जितना इनको सबसे मुस्किल लगा क्यू की वो हब है अगर उसको जित लिया तो बाकी सारे राज्य अपने आप ही कंट्रोल में आ जायेंगे तो इन्होने सबसे पहले राजा मान सिंह जो अमेर जयपुर के थे उनको अपने साथ मिला लिया और 30 हजार लोगो की मृत्यु हो गयी बहोत ही खतरनाक युद्ध हुआ चितोड़ का और इस युद्ध में अकबर जीत गया.

 

अकबर कौन था  इसी युद्ध के दौरान रंथाम्बोर जल्दी से हार मान गया जैसलमेर भी जल्दी से हार मान गया अकबर के सामने इसी तरह करते करते सरे राजपूत सब इनके साथ जुड़ते चले गये अकबर की एक और खास बात अगर आप को न पता हो तो मै बता दूँ

 

की इनसे जो भी राजा जुड़ जाता था ये उनसे पारिवारिक रिश्ता बना लेते थे जैसे उनके घर की एक लड़की से खुद ही शादी कर लेते थे उनको अपने परिवार का हिस्सा बना लेते थे जिससे की वो चाह कर भी कभी गद्दारी न कर सके और उनकी रियासते उनको वापिस कर देते थे.

 

 की बस एक शर्त होती थी की वो उस राजा से हर महीने या साल में टेक्स ले लिया करते थे और उस राजा को यह पूरी आज़ादी होती थी की तुम अपनी रियासत दुबारा चलाओ इससे लोगो में विश्वास बड़ता था और मान सिंह और उनका पूरा परिवार अकबर के महल में आ कर रहने लग गये और मान सिंह अकबर के 9 रत्नों में भी शामिल हो गये.

 

जलालुदीन बहोत master mind था इनसे राजपूतो को ही आपस में लडवा दिया राजपूत राजपूत आपस में ही लड़ने लगे इनसे राजा मान सिंह जिसको अपने साथ में कर रखा था राजा मान सिंह से महाराणा उदय पुर को लडवाया राजा मानसिंह से महाराणा प्रताप को लडवाया

 

ये पूरा राजस्थान तो जीत गया था लेकिन छोटी से एक रियासत मेवाड़ को जितने में अकबर के पसीने छुट गये थे क्यू की मेवाड़ की जिम्मेवारी महाराजा प्रताप के हाथो में थे जिनका कद 7.5 फिट था जिसके सामने अकबर एक छोटा बच्चा लगता था.

 

महाराणा प्रताप अकबर और के बिच कई युद्ध हुए लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह थी की अकबर कभी महाराणा प्रातक के सामने नहीं आया क्यू की अकबर जानता था की अगर वो महाराणा प्रताप के सामने आया तो वो उसके 40 किलो की दो धारी तलवार से अकबर के दो टुकड़े कर देंगे

 

शायद इसी वजह से अकबर हमेशा अपने मंत्रियो को ही भेजता रहा जिससे हुआ ये की महाराणा प्रताप के पास जितनी भी सेना थी वो सभी ख़तम हो गयी थी अब बचे थे तो केवल महाराणा प्रताप.

 

 

अकबर ने भारत के north vest तरफ के जितने भी section थे उनको अपने कंट्रोल में ले लिया कश्मीर से काबुल तक काबुल से कंधार तक और जो बलूचिस्तान पकिस्तान का जो अब हिस्सा है उन सभी जगहों पर अब अकबर का राज था.

 

अकबर के अगर सुरुआती जीवन में चले तो जब ये आगरा में रहा करते थे तो बैरान खान प्रमुख सेना पति था ये हमेशा उसके देख रेख में रहते थे बैरान खान अकबर के सुरुँती जीवन में बड़ा Contribution था लेकिन धीरे धीरे बैरान खान में कुछ अकड़ आने के कारण

 

वो अकबर के खिलाफ थोडा आक्रामक होने लगे और अकबर उस समय 18 साल के होने वाले थे अकबर छोटे थे लेकिन जानते थे की यहा आगरा में बैठ कर बैरान खान के खिलाफ कुछ भी करूंगा तो मारा जाऊंगा 

 

इन्होने चुप चाप जा कर बैरान खान को बोला की मै शिकार करने जा रहा हु और आगरा से शिकार करने के बहाने दिल्ली आ गये और दिल्ली आ कर इन्होने सब को बता दिया फरमान जारी कर दिया की मै ही शासक हु बैरान खान खान का कोई रोल नहीं रहा अब बेचारा बैरान खान जैसे ही तयारी किया युद्ध करने की अकबर ने उसक तुरंत दबा दिया और बैरान खान ने जल्दी हार भी मान ली क्यू की वो अकबर को मारना भी नहीं चाहता था.

 

अकबर कौन था  इनकी सबसे अच्छी बात यह थी की अपने शत्रु को माफ़ कर के उनको अपना मित्र बना लेते थे उनका मानना यह था की शत्रुओ को अपने खिलाफ बनाये रखने से अच्छा यह है की उनको अपना मित्र ही बना कर अपनी जिन्दगी में शत्रुओ की कमी क्यू न की जाए

 

बास बहादुर जो की मंडवा का शासक था उससे लड़ने के लिए इन्होने आदम खान को भेजा आदम खान ने जा कर बास बहादुर को उखाड़ दिया और वहा जा कर शासन करने लगा लेकिन आदम खान का स्टाइल वही था की हमेशा जनता को परेशान करना और औरतो की इज्ज़त लुट लेना उनको तंग करना तो अकबर वापिस आया और आदम खान को वहा से हटा दिया

 

फिर अकबर ने सोचा की बास बहादुर को फिर से बुलाया जाए और जो की एसा उसने किया भी और उसको उसकी रियासत वापिस कर दी यह बोल कर की आप को हमें अपने राज्य की कमाई का टेक्स हमें देना होगा और यही नहीं जब भी कभी हमारा युद्ध किसी से भी होगा तो उसमे आप हमारा पूरी तरह सहयोग देंगे जिसको बास बहादुर ने बड़े ही आदर के साथ मान लिया  

 

Leave a Comment