Amarnath Yatra अमरनाथ यात्रा का रहस्य 2020

Amarnath Yatra दोस्तों भारत एक रहस्यमय देश है यहाँ कई ऐसे राज छिपे हैं जिन्हें आज तक कोई सुलझा नहीं पाया है इसके इतिहास में जब हम झांकते हैं तो हमे एक से एक ऐसे रहस्य देखने को मिलते हैं की हम आश्चर्य में पड़ जाते हैं.

 

इस रहस्यों को देखने के बाद हम खुद से पूछते हैं की आखिर ये कैसे संभव है हजारो साल पहले इतना उन्नत और आधुनिक विज्ञानं हम भारतीयों के पास था इस पर विश्वास नहीं होता है.

 

दोस्तों आज हम भारत के सबसे पुराने रहस्य के बारे में बताने वाले हैं जिसको जान कर आप लोगो को यकीन नहीं होगा आप लोग सन्न रह जायेंगे की आखिर ये कौन से तकनीक है जिससे हर साल बर्फ उसी जगह पर जम कर एक शिवलिंग का आकार ले लेती है.Amarnath Yatra

 

अमरनाथ Amarnath की इस दिव्य गुफा में हर सावन में हिमलिंग का बनना किसी चमत्कार से कम नहीं है वैसे तो इस पूरी गुफा में जगह जगह पानी टपकता रहता है लेकिन गुफा के भीतरी हिस्से के कोने में हर साल उसी जगह पर हिमलिंग का बनना विज्ञानं को भी चुनौती देता है|Amarnath Yatra

 

Amarnath Yatra आश्चर्य में घिरा अमरनाथ Amarnath गुफा का रहस्य 

अमरनाथ Amarnath की गुफा का हिन्दू धर्म में खास महत्त्व है या गुफा हिंदुवो के अहम् तीर्थ स्थलों में से एक है ऐसे में हर कोई यहाँ आ कर बाबा बर्फानी के दर्शन करना चाहता है और उनका आशीर्वाद पाना चाहता है लेकिन क्या आप जानते हैं की अमरनाथ Amarnath गुफा से जुड़े हुए कुछ ऐसे रहस्य हैं.

 

जिन्हें आज तक कोई भी नहीं सुलझा पाया है अमरनाथ Amarnath की गुफा श्रीनगर से करीब 145 किलोमीटर की दुरी पर हिमालय पर्वत श्रृंखला में मौजूद है समुद्र तल से 3978 मीटर की उचाई पर मौजूद ये गुफा 150 फिट उचीं और करीब 90 फीट लम्बी है.Amarnath Yatra

 

अमरनाथ यात्रा amarnath yatra पर जाने के लिए दो रास्ते हैं एक पहलगांव हो कर जाता है और दूसरा सोनवर्ग बालटाल से जाता है यानि देश भर के किसी भी क्षेत्र से पहले पहलगांव या बालटाल पहुचना होता है इसके बाद ही यात्रा की पैदल सुरुआत की जाती है.

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Amarnath Yatra कितनी पुरानी हैं अमरनाथ Amarnath की गुफा 

गुफा कितनी पुरानी है इसका कोई ठोस जवाब तो नहीं है लेकिन कहा जाता है की वूटा मलिक के जरिये 18वी सदी में इस गुफा के अस्तित्व का पता चला था बाद में काफी समय तक अमरनाथ Amarnath गुफा के चडावे का कुछ हिस्सा वूटा मलिक के परिवार को भी दिया जाता था.Amarnath Yatra

 

एक बात और प्रचलन में रही थी की गुफा को सबसे पहले भ्रीगु ऋषि ने देखा था हलाकि इसका कोई प्रमाण नहीं है बाबा अमरनाथ Amarnath की गुफा में बर्फ से शिवलिंग तैयार होती है लेकिन इस बर्फ के लिए पानी कहा से आता है इस बात का आज तक पता नहीं चल पाया है.

 

अमरनाथ Amarnath की गुफा के अन्दर बर्फ तो ठोस होती है लेकिन बाहर की बर्फ बेहद ही मुलायम और कच्ची होती है ऐसा क्यों होता है इस बारे में आज तक कोई भी नहीं जान पाया है आप को बता दें की जो लोग यहाँ आते हैं वो काफी ज्यादा थके हुए होते हैं.Amarnath Yatra

 

लेकिन जैसे ही बाबा बर्फानी की गुफा में प्रवेश करते हैं उनकी सारी थकान अपने आप ही दूर हो जाती है ऐसे क्यों होता है ये कोई भी आज तक नहीं जान पाया है कुछ लोगो को यहाँ आने पर दिव्य शक्तियों का आभास होता है ऐसे आभास का दावा कई सारे लोग कर चुके हैं लेकिन ऐसा क्यों होता है ये भी आज तक एक रहस्य ही है|

 

अमरनाथ Amarnath गुफा में कैसे बनता है शिवलिंग

अमरनाथ Amarnath गुफा के अन्दर उपर से बर्फ के पानी की बुँदे जगह जगह टपकती रहती हैं यानि पर सेंटर में एक ऐसी जगह है जिसमे टपकने  वाली बूंदों से लगभग 10 फीट लम्बा शिवलिंग बनता है.Amarnath Yatra

 

गुफा के सेंटर में पहले बर्फ का गोला बनता है जो थोडा थोडा कर के 15 दिन तक रोजाना बढ़ता रहता है और दो गज से अधिक ऊँचा हो जाता है गुफा में बनने वाले हिमलिंग का सम्बन्ध चंद्रमा से भी माना जाता है.

 

पूर्णिमा में अपने पूर्ण आकार में आ जाने वाला चाँद अमावश्या तक गायब हो जाता है गुफा में बनने वाला बर्फ का शिवलिंग भी चाँद के साथ ही बढ़ता जाता है और पूर्णिमा को अपने पूर्ण आकार में होता है.Amarnath Yatra

 

इसके बात चाँद के आकार के साथ साथ हिमलिंग भी पिघलता जाता है और अमावश्या तक आते आते गायब हो जाता है सवाल ये भी उठता है की ऐसा क्या है की चाँद का असर इस बर्फ के शिवलिंग पर ही पड़ता है.

 

इस इलाके में कई गुफा हैं जहा बूंद बूंद पानी गिरता है लेकिन वो सभी हिमलिंग का रूप क्यों नहीं ले पाती हैं अमरावती के रास्ते पर आगे बड़ते समय और भी कई छोटी बड़ी गुफाएं दिखती हैं वो सभी बर्फ से ढकी हैं और वहा पर छत से बूंद बूंद पानी टपकता है.Amarnath Yatra

 

लेकिन वहा कोई शिवलिंग नहीं बनता है बीते कई सालों से हिमलिंग यात्रा के ख़त्म होने से पहले ही पिघल जा रहा है इसकी बड़ी वजह लगातार श्र्धालुवो का बढ़ना और गुफा के आस पास का तापमान ज्यादा होना है गुफा में शिव के प्रति हिमलिंग के साथ दो और हिमलिंग भी बनते हैं जिन्हें पार्वती और गणेश का प्रतिरूप माना जाता है|

 

गुफा में मौजूद कबूतरों का रहस्य

कहा जाता है की एक बार माता पार्वती ने महा देव से पूछा की ऐसा क्यों है की आप अजर अमर हैं और आप के गर्दन पर पड़ी नरमुंड की माला का रहस्य क्या है कहते हैं की इस रहस्य को बताने के लिए भगवान् शिव को एक एकांत जगह की आवश्कता थी.Amarnath Yatra

 

जिसे तलाशते हुए वो माता पार्वती को लेकर आगे बड़ते चले गए एक गुप्त जगह की तलाश में, महादेव ने अपने वाहन नंदी को सबसे पहले छोड़ा नंदी जिस जगह पर छुटा उसे ही पहलगावं कहा जाने लगा.

 

जहा से अमरनाथ Amarnath यात्रा Amarnath Yatra सुरु होती है यहाँ से कुछ आगे जाने पर शिव जी ने अपने माथे से चंद्रमा को अलग कर दिया था पुराणों के मुताबिक भगवान् शिव माता पार्वती को अमृत की कहानी सुनाने के लिए वीरान इलाके में मौजूद इस गुफा में ले कर आये थे.Amarnath Yatra

 

कहानी सुनने के दौरान माता पार्वती को नींद आ गयी लेकिन वहा मौजूद कबूतरों का एक जोड़ा भगवान शिव की कहानी सुनाने के दौरान लगातार आवाज़ निकलता रहा जिससे भगवान् शिव को लगा की पार्वती कहानी सुन रही हैं.

 

कहानी सुन लेने के चलते इन कबूतरों को भी अमृत मिल गया जिस जगह पर 8 महीने इन्शानो का वजूद नही रहता भयंकर बर्फ बारी के चलते किसी भी जानवर के लिए अपना अस्तित्व बनाये रखना नामुमकिन हो जाता है वहा आज भी अमरनाथ Amarnath गुफा के दर्शन करते वक्त कबूतर दिख जाते हैं|Amarnath Yatra

 

पुराणों में है अमरनाथ Amarnath गुफा का जिक्र

अमरनाथ Amarnath गुफा को पुरातत्व विभाग 5000 साल पुराना मानता है मतलब महाभारत काल से ये गुफा यहाँ मौजूद है लेकिन उनका ये आकलन गलत हो सकता है क्युकी सवाल ये उठता है की जब 5000 साल पहले गुफा थी.

 

तो उससे पहले से भी यहाँ गुफा मौजूद हो सकती है दरअसल हिमालय के प्राचीन पहाड़ो को लाखो साल पुराना माना जाता है उनमे कोई गुफा बनाई गयी हो तो वो हिमयुग के दौरान ही बनाई गयी होगी मतलब आज से 12000 से 13000 साल पहले,Amarnath Yatra

कश्मीर पर केन्द्रित 12वी सदी में लिखी गयी कल्हण की राजतरंगनी से ले कर नीलमत पुराण तक में अमरनाथ Amarnath गुफा का जिक्र मिलता है जिससे साफ है की इस पवित्र गुफा का अस्तित्व सदियों पुराना है.

 

अमरनाथ Amarnath गुफा को ले कर कई कहानियां हैं

अमरनाथ Amarnath गुफा को ले कर कई कहानियां हैं उनमे से एक ये है की इस पवित्र गुफा को सबसे पहले गुज्जर समाज के मुस्लिम गड़ेरिये वूटा मलिक ने उस समय देखा था जब वो अपनी बकरियां चराते हुए वहा पहुच गया था.Amarnath Yatra

 

एक अंग्रेजी लेखक लोरेन्स ने अपनी किताब वैली ऑफ़ कश्मीर में लिखा है की पहले मट्टन के कश्मीरी ब्राम्हण अमरनाथ Amarnath के तीर्थ यात्रियों की यात्रा कराते थे बाद में बड्कुक के मलिकों ने ये जिम्मेदारी सभाली क्युकी रास्ते को बनाये रखना.

 

और गाइड के रूप में काम करना उनकी जिम्मेदारी थी मलिको को मौसम की जानकारी भी होती थी आज भी अमरनाथ Amarnath गुफा का 1 चौथाई चड़ाव इस मुसलमान गड़ेरिये के वंशजो को ही मिलता है|Amarnath Yatra

 

अमरनाथ Amarnath गुफा का रहस्य  हेल्लो दोस्तों आज की इस पोस्ट में आप लोगो ने अमरनाथ Amarnath के कुछ रहस्यों के बारे में जाना और साथ ही यह जाना की कैसे भगवान् शिव इस  अमरनाथ Amarnath तक पहुचे उम्मीद है की आप लोगो को यह पोस्ट अच्छा लगा होगा.

और कुछ नया सिखने को मिला होगा अगर इस पोस्ट से कुछ नया जानने को मिला है तो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को जरुरी भेजे मिलते है अगली पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार !

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