910 साल पहले महीनो तक आसमान से गायब हो गया था चंद्रमा

Chand gayab hua tha  910 साल पहले महीनो तक आसमान से गायब हो गया था चंद्रमा

धरती के उपग्रह चंद्रमा हमेशा से ही इंसानों के लिए जिज्ञासा का विषय रहा है चाँद को करीब से देखने और उसके रहस्यों को जानने का मिशन आज से करीब 50 साल पहले 1969 में सुरु हुआ था.

 

chand gayab hua tha  अमेरिका और रूस जैसे देशो की तरह ही भारत ने भी चंद्रयान मिशन से चाँद के बारे में कई जानकारी हासिल की Neil Armstron चाँद पर जाने वाले पहले व्यक्ति थे तब से दुनिया भर के वैज्ञानिको को अब तक चाँद के बारे में कई बातें पता हुई हैं.

 

और भारत ने भी कई कामयाबी हासिल की है क्या आप जानते है की चाँद का तापमान क्या है क्या आप को पता है चाँद पर पहाड़ है या नहीं ये कुछ ऐसे अनसुलझे राज़ हैं जिनके ज्यादा तर जवाब इन्शानो ने पा लिए हैं.

 

और जिन सवालों के जवाब नहीं मिले उसे जानने के लिए पूरी कोशिश  लगातार जारी है क्या आप कभी सोच सकते हैं की बिना चाँद वाली रात आखिर कैसी दिखती होगी अगर चाँद गायब हो जाए तो लोगो को कैसा लगेगा.

 

 

सोचिये अगर इस धरती का चाँद होता ही नहीं तो कैसी होती हमारी दुनिया क्या आप कल्पना कर सकते है की आसमान में महीनों तक चाँद ही न दिखे क्या आप लोगो ने सोचा है की तब क्या होगा.

 

आज के समय में तो यह कहना असंभव सा है की चाँद कहीं गायब हो सकता है लेकिन काफी सालों पहले चाँद आसमान से गायब हो गया था और आप लोगो को यह बात जान कर हैरानी हो रही होगी लेकिन ये पूरी तरीके से सच है.

 

910 साल पहले गायब हो गया था चाँद  

chand gayab hua tha  Switzerland के Geneve Universite के शोध कर्ताओं ने इस बात का खुलासा किया है की करीब 910 साल पहले चाँद महीनों के लिए गायब हो गया था 910 साल पहले कई महीनों तक धरती पर सिर्फ रात थी.

 

दिन की रोशनी तो पता चलती थी लेकिन रात होते ही चाँद नही दिखता था रात और काली दिखती थी ऐसा हुआ था धरती की वजह से और इस बात ने वैज्ञानिको को भी काफी हैरान किया.

 

chand gayab hua tha  वैज्ञानिको का ये शोध Climatic and Socialite impactocta 1109 1110 शीर्षक से Nature journal में प्रकाशित हुआ है वैज्ञानिको के इस खुलासो से चाँद के बारे में कई राजो से पर्दा उठ गया है.

 

शोधकर्ताओं को लगता है की ज्वालामुखी की राख सल्फर और ठण्ढे मौसम की वजह से चाँद दिखना बंद हो गया था लेकिन शोधकर्ताओं का रिसर्च में ध्यान ये पता करने में था की ऐसे ज्वालामुखी विस्पोट हुआ करते थे या नहीं|

 

1108 में  प्रथ्वी की वायुमंडल में अचानक सल्फर की मात्रा में तेज़ी

शोध के अनुशार साल 1108 के मध्य में प्रथ्वी की वायुमंडल में अचानक ही सल्फर की मात्रा में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई थी ऐसा उसके अगले 2 साल तक हर साल के अंत में होता था जो अगले साल के सुरुआती महीनों तक होता रहता था.

 

chand gayab  दरअसल उस समय आइसलैंड ज्वालामुखी हेकला में भयानक विस्पोट हुआ था इसके बाद लगातार उनमे छोटे छोटे विस्पोट होते रहते थे ज्वालामुखी हेकला के विस्पोटो से भरी मात्रा में सल्फर गैस और राख निकली थी|

Chand Gayab

 

1108 से 1113 तक चंद्रमा धरती से नहीं दिखा

जो सर्दियों की वजह से हवा में तेज़ी से घुलती चली गयी धीरे धीरे 4 साल में इसने धरती के Stripper Pair को ढक लिया था और फिर पूरी धरती में हर तरफ अँधेरा ही अँधेरा छा गया था.

 

1108 से 1113 तक धरती के उपर कई महीनो तक दिन में थोड़ी रेशनी तो पता चलती थी लेकिन रात और काली हो जाती थी धरती के किसी भी कोने में से चाँद नहीं दिखता था|

 

धरती पर सल्फर की मात्रा में हुई थी बढ़ोत्तरी

इसका अध्यन करने के लिए वैज्ञानिको को काफी मेहनत करनी पड़ी थी एक दुसरे शोध के अनुसार सल्फर की ये मात्रा बढ़ी और सल्फर Stripper Pair तक पहुच गया लेकिन बाद में ये सल्फर निचे भी आ गया और बर्फ़ में जम गया.

 

ये घटना ग्रीनलैंड से लेकर अन्टार्टिका तक हुई वैज्ञानिको को इस बात के प्रमाण मिले हैं उन्ही इलाको में जगह जगह बर्फ में सल्फर की मात्रा जमी मिली जो की 1108 से 1110 के बिच की है.

 

अब तक इससे पहले हुए स्टडी में ऐसा माना गया था की सल्फर की मात्रा बढ़ने का कारण 1104 में आइसलैंड के हेकला ज्वालामुखी का फूटना था लेकिन वैज्ञानिको ने बाद में सबूत जुटायें और बड़े पैमाने पर उस समय जमा हुए सल्फर का कारण हेकला के होने से इन्कार किया.

 

शोधकर्ताओं का मानना है जी ज्वालामुखी की चाँद को छिपाने में एक लौती नहीं तो अहम् भूमिका तो रही ही होगी इसके आलावा यूरोप की अन्य घटनाएं भी इशारा करतीं हैं की उस दौरान वहा बहुत बड़ा असामान्य मौसम का परिवर्तन दिखाई दिया था.

 

कई लोगो का मानना है की अभी इसकी पुष्टि हो गयी है कहना ठीक नही होगा लेकिन फिलहाल इन सारी कड़ीयो के जुड़ने पर शोधकर्ताओं के अनुमान को ही पुष्टि करती दिख रही है.

 

अब जरा ये सोचिये की चाँद हमेशा के लिए आसमान से गायब हो जाए तो क्या होगा क्या बिना चाँद के धरती का कोई अस्तित्व होगा क्या चाँद के बिना ख़त्म हो जायेगी धरती|

 

अगर आसमान से चाँद गायब हो जाए तो क्या होगा

अगर पहले की तरह एक बार फिर से चाँद धरती से गायब हो जाये तो धरती पर बहुत ज्यादा बदलाव देखने को मिलेगा सबसे पहले तो इसका असर दिन और रात पर होगा चाँद के गायब होते ही धरती पर दिन रात 24 घंटे के बजाए सिर्फ 6 से 12 घंटे का ही होता.

 

1 साल में 365 दिन नही बल्कि 1000 से 1400 के आस पास दिन होता ये तो आप जानते ही होंगे की रात में हलकी रौशनी चाँद के कारण ही होती है लेकिन जब चाँद ही नहीं होता तो रौशनी भी नहीं होती.

 

हर जगह गहरा अँधेरा ही छाया रहता इसके आलावा अगर चाँद गायब हो जाएगा तो ग्रहण भी लगना बंद हो जाएगा चाँद अगर नहीं होता तो धरती पर न तो चन्द्र ग्रहण होता और न ही सूर्यग्रहण होता.

 

क्यू की सूरज को ढकने के लिए चंद्रमा होता ही नहीं वैज्ञानिको की माने तो अगर चाँद नही होता तो शायद पृथ्वी पर मानव जाति का उदय भी नही होता क्यू की समुद्रो में ज्वारभाटा ही नहीं आता.

 

जिससे ज़मीन और समुद्रीय जल के बीच पोसक तत्वों के आदान प्रदान की प्रक्रिया धीमी हो जाती और धारी पर मानव जाती होती भी या नही ये कहना मुश्किल है इस लिए चाँद का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्त्व है|

 

910 साल पहले महीनो तक आसमान से गायब हो गया था चंद्रमा हेल्लो दोस्तों आज आप ने इस पोस्ट के माध्यम से यह जाना की आज से 910 साल पहले चंद्रमा कैसे गायब हो गया था और क्यू आशा करता हु की आप लोगो को इसके बारे में पूरी और सही जानकारी मिल गयी होगी.

 

अगर इस संदर्भ में आप का कोई सुझाव है तो हमे जरुर बतायें और उम्मीद करता हु की आप को हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा होगा अगर अच्छा लगा हो तो कमेंट कर के जरुर बतायें.

 

और हमे सोसल अकाउंट में जा कर फोलो कर ले हम वहा पर भी अच्छी अच्छी पोस्ट डालते रहते है जिससे की आप लोगो को अपने एग्जाम और इंटरव्यू में काफी मदद मिलेगी अगर आप हमारी हर पोस्ट अच्छे से पड़ते है तो मिलते है अगले पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार !

 

2 thoughts on “910 साल पहले महीनो तक आसमान से गायब हो गया था चंद्रमा”

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