ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar | इसरो बनाएगा चाँद को बिजली घर

ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar दोस्तों आज हम सब जानते हैं विज्ञानं ने काफी तरक्की कर ली है बहुत से नये अविष्कारों के चलते दुनिया को एक अलग ही मुकाम पर ला कर खड़ा किया है हलाकि साइंस की रफ्तार वक्त के साथ बढती ही जा रही है दुनिया के इस नये दौर में इसमें तगड़ा इजाफा होने वाला है.

 

  • चाँद को ले कर भारत की सबसे बड़ी प्लानिंग
  • जो किसी ने नहीं सोचा उसमे इसरो का फोकस
  • भारत की प्लानिंग से दुनिया में आएगी बहार

 

चुकी दुनिया की तमाम रिसर्च संस्थाएं जुटी हुई हैं लिहाजा भारत ने रेस में अपने कदम बहुत तेज़ी से बढ़ाये हैं और इस लेख के जरिये जो बात हम आप तक पहुचाने वाले हैं जो जान कर आप रोमांचित हो उठेंगे.

 

क्यों की इस लेख के जरिये हम इसरो के उस सबसे बड़े मिशन से रूबरू करवाने वाले हैं जो आप का दिल खुश कर देगा दोस्तों आप ने पिछले साल चंद्रयान 2 मिशन के बारे में तो सुना ही होगा.

 

की इसरो इस मिशन के जरिये चंद्रमा पर घने साम्प्रदा खोजने वाले काम पर जुटा है हालाकि भारत का लैंडर मौके पर चाँद की सतह पर ठीक से नहीं उतर पाया और अब इसरो बहुत तेज़ी से दूसरा चंद्रयान मिशन भेजने जा रहा है.ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

इस लेख में आप को इस मिशन की ताज़ा जानकारी देंगे लेकिन उससे पहले इस चन्द्र मिशन से जुड़े खास बात बताने वाले हैं ये जानकारी इसरो वैज्ञानिक और चंद्रयान 2 मिशन से जुड़े डॉक्टर राजमल जैन ने साझा की है|

 

चाँद पर बनेगा भारत का बिजली घर

जिनके मुताबिक इसरो का अगला प्रयास चंद्रमा में इलेक्ट्रो हाउस यानि पावर हाउस बनाने का है चंद्रमा का 54 फीसदी हिस्सा रौशनी से भरा है लिहाजा अगर हम वहा से धरती पर बिजली लाने पर सफल रहे तो ये दुनिया के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा बड़ी बात ये है की बिजली हमें 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से मिल पाएगी.

 

हालाकि चाँद से धरती पर बिजली लाना कोई हलवा नहीं है ये बेहद कठिन मिशन है और खुद इसरो इसमें अकेला कुछ नहीं कर सकता है लिहाजा इस काम के लिए दुसरे देशो को भी मिलाने पर काम हो रहा है ताकि सब मिल कर ये काम कर सकें|ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

नासा नहीं इसरो कर सकता है दुनिया का नेत्रत्व

कुछ वक्त पहले खुद इसरो के चेयरमैंन के शिवन ने कहा था की चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा की खोज कई देश कर रहे हैं जिन देशो के पास इसे खोज कर धरती पर लाने की क्षमता है वे इस पूरी प्रक्रिया को आगे ले जाएंगे.

 

भारत इस प्रकिया में इन देशो के साथ ही नहीं चलना चाहता बल्कि आगे बढ़ कर उनका नेत्रत्व करना चाहता है भारत के चन्द्र मिशन के मुताबिक भारतीय वैज्ञानिको ने अपना ध्यान चंद्रमा से मिलने वाली ऊर्जा पर लगाया है.

 

चाँद पर सोलर के साथ ही परमाणु ऊर्जा की खोज में जुटे वैज्ञानिको का यह शोध अगर पूरा हुआ तो दुनिया की अगले 250 साल तक की ऊर्जा जरूरते पूरी हो जायेंगीं यानि भारतीय वैज्ञानिक चंद्रमा पर ऐसे बिजली की तलाश में हैं.

 

जिसके मिल जाने के बाद पुरे विश्व को न्यूक्लियर एनर्जी से रौशन किया जा सकेगा चंद्रमा को ले कर भारतीय वैज्ञानिको का ये अनुसंधान दुनिया में अपनी तरह का एक अनोखा कदम है|

 

चाँद की ऊर्जा से कैसे जगमग होगी धरती

अमेरिका के अपोलो मिशन से ये बात साबित हो चुकी है की चंद्रमा पर हीलियम 3 प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है अपोलो 17 मिशन के तहत साल 1972 में चंद्रमा पर उतरने वाले अंतरिक्ष यात्री जुलोजिस्ट हैरिसन स्किमिट ने भी हीलियम 3 के खनन की संभावनाएं जताई थीं.ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

सूर्य की तरफ से चलने वाली हवाएं चंद्रमा पर लगातार हीलियम 3 की बरसात करती रहती हैं ये हवाए हमारी धरती पर भी आती हैं लेकिन पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र इन हवाओ से हमारे वातावरण को बचा लेता है वही चंद्रमा पर इन शौर्य हवाओ को रोकने के लिए कोई कवच नहीं है.

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इस लिए बड़ी तादाद में हीलियम 3 इकठा होता जा रहा है हीलियम 3 परमाणु ऊर्जा का अपार स्रोत है यूरोपियन स्पेस एजंसी के मुताबिक हीलियम 3 परमाणु ऊर्जा का सुरक्षित स्रोत है परमाणु ऊर्जा पैदा करने वाले अन्य रासायनिक तत्वों की तुलना में ये रेडिओ एक्टिव नहीं हैं.

 

साथ ही अन्य तत्वों की तरह इसके अपशिस्ट भी नहीं होते इसलिए मानव के लिए हीलियम 3 सुरक्षित परमाणु ऊर्जा के लिए विकल्प के तौर पर सबसे सही स्रोत है नासा का अनुमान है की चंद्रमा पर हीलियम 3 का 10 लाख मिलियन टन से भी ज्यादा बड़ा भण्डार है.

 

इसमें से एक चौथाई मात्रा ही धरती पर लाइ जा सकती है चंद्रमा पर मौजूद हीलियम 3 के एक चौथाई हिस्से से धरती पर 2 से 3 सदियों के लिए ऊर्जा की अवश्यकता पूरी हो सकती है एक टन हीलियम 3 के अनुमानित कीमत करीब 5 अरब रूपए है आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं.

 

की 250 लाख हीलियम 3 की कीमत अरबो खरबों रूपए तक जा सकती है हालाकि की अभी इसमें कई कठनाईयां हैं हीलियम 3 को इकठा करना उसे धरती पर लाना यहाँ उसके अनुरूप सेंटर बना कर उस तत्व को ऊर्जा में तब्दील करना कठिन काम है |ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

चाँद पर क्यों नहीं उतरा भारत का लैंडर

चंद्रयान 2 के लैंडर के नाकामी को ले कर वैज्ञानिक जैन का कहना है की मै इसे असफल प्रयोग नहीं मानता क्यों की यान चंद्रमा के बहुत नजदीक पहुच गया था तब उसमे ब्रेक लगाने की कोशिस के दौरान कुछ दिक्कते आ गयी थीं.

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यानि उसके फ़ोर्स में गड़बड़ी हो गयी लिहाजा वो रुका नहीं बल्कि उसकी दिशा बादल गयी इसरो ने चंद्रमा के साऊथ पोल पर जाने की चुनौती ली थी इस चुनौती को लेने के पीछे दो फायदे नज़र आ रहे थे.

 

पहला फायदा चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी और दूसरा फायदा चंद्रमा की तत्व संरचना का पता लगाना था इसरो लगातार चंद्रमा के तत्व संरचना का पता लगाने की कोशिस कर रहा है अगर तत्व संरचना के बारे में वस्तु स्थिति पता चल जाती है तो इस रहस्य से पर्दा हट जाएगा की चंद्रमा धरती का हिस्सा था या ये दोनों साथ साथ बने थे.

 

अभी दुनिया में क्या चल रहा है

जनवरी 2019 में चाइना को पहली बार चाँद के पिछले हिस्से में दक्षिण धुर्वी इलाके में यान उतारने में कामयाबी मिली है चाँद के शोध में ये एक महत्वपूर्ण कदम था रोवर पता करेगा की सूरज के हाइड्रोजन कड़ों का चाँद की उपरी सतह के साथ कैसा ताल मेल होता है.ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

इस बीच यूरोप में यूरोपियन स्पेस एजंसी एक हाईटेक प्रयोगशाला बना रही है जहा चाँद की सतह से एक किलो मीटर निचे के सैम्पल लिए जायेंगे और इस बात का पता लगाया जाएगा की उसमे कितना पानी और कितना ऑक्सीजन है.

 

शोध करने वाले रोबोर्ट्स सारे जाँच नहीं कर सकते इस लिए सैम्पल  चाँद से वापस धरती पर भी लाये जायेंगे पत्थरों को जमा करने और उन्हें धरती पर भेजने के लिए जटिल तकनीक की जरुरत होती है.

 

आप को बता दे की इस वक्त नासा चाँद पर 2024 तक मानव मिशन भेजने वाला है वही जापान और यूरोपियन स्पेस एजंसी भी लगातार कोशिस में जुटी हुई हैं.ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

चाँद पर बस्ती बसाने की तैयारी

चाँद की तस्बीर पूरी तरह बदल गयी है पिछले दसको में कई देशो के ढेर सारे शोध उपग्रहों ने चाँद को अपनी नजरो में कैद किया है इस बीच चंद्रमा सौरमण्डल में मौजूद ऐसा पिंड बन गया है जिसपर धरती के बाद सबसे ज्यादा शोध हुआ है.

 

सदियों तक माना जाता था की चाँद के दक्षिण ध्रुव पर पानी हो सकता है वहा ज्वालामुखी के विस्पोट के बाद ऐसे गड्ढे पैदा हुए हैं जिनपर अरबो सालों से धुप नहीं पड़ी है इन्हें कोल ट्रैक कहा जाता है ऐसा इस लिए क्यों की गड्ढो का तल चाँद के दुसरो इलाको से कही ज्यादा ठंढा है यहाँ तापमान -240 डिग्री होता है.

 

भारत के यान ने खोजा था चाँद पर पानी

भारत ने अपना पहला चंद्रयान 2008 में भेजा था उसे उत्तरीय ध्रुव पर 40 से ज्यादा गड्ढ़ो में बर्फ की सकल में पानी मिला शोधकर्ताओ को लगता है की वहा 60 करोड़ टन बर्फ हो सकती है.

 

चाँद पर बनाये जाने वाले अंतरिक्ष केंद्र के लिए ये जरुरी संसाधन होगा वैज्ञानिको का मानना है की ध्रुव केतुवो और शुद्ध ग्रहों के जरिये पानी चाँद पर पंहुचा होगा और सायद सूरज के जरिये भी क्यों की सूरज चाँद पर हाइड्रोजन के अणुवो की बमबारी करता है.

 

फिर ये कण धरातल में घुस गए होंगे और वहा पत्थरो में मौजूद ऑक्सीजन से मिल कर पानी बना होगा फ़ीर उसका एक हिस्सा बहार निकल कर ठंढे गड्ढो में जमा हो गया होगा भारत के यान से मिले आंकड़ो के आधार पर नासा ने एक खुलासा किया था.

 

उसमे कहा गया था की चाँद के धरातल से बार बार पानी बाहर नकालता है खासकर तब जब यहाँ सुद्ध ग्रहों की बरसात होती है पानी वाले पत्थर एक सेंटीमीटर मोटी धुल से ढके होते हैं चाँद पर सचमुच कितना पानी है इसका पता आने वाले सालो में चाँद पर भेजे जाने वाले रोबोर्ट करेंगे|ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

चाँद पर ज्वालामुखी का रहस्य खुला

2009 में अमेरीकी शोध उपग्रह को ज्वालामुखी का रहस्य खोजने में कामयाबी मिली थी इसे लम्बे समय से लगाये जा रहे अनुमान की पुष्टि हुई दरअसल नासा का luner ऑर्बिटर निचली कक्षा में चाँद का चक्कर लगा रहा था उस वक्त नासा ने एक ज्वालामुखी में एक रोकेट स्टेज पाया जिसका एक स्पेस क्राफ्ट के जरिये रिसर्च किया गया इस स्पेस क्राफ्ट में वहा पैदा हुए गुबार का अध्यन किया गया.

 

उसके बाद वो भी ज्वालामुखी में जा गिरा नासा का luner ऑर्बिटर रोकेट स्टेज और अंतरिक्ष यान के गिरने की जगहों का कई यंत्रो की मदद से मुवायना किया इस दौरान ऑर्बिटर को मिले आंकड़ो में वैज्ञानिको को बड़ी बात पता चली की ज्वालामुखी से निकले गुबार में पानी की मात्रा मौजूद थी.ISRO Banayega Chand Ko Bijali Ghar

 

चाँद पर बनेगा भारत का बिजली घर : हेल्लो दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से आप ने यह जाना की इसरो अपने नये मिशन में क्या नया करने वाला है और साथ ही यह जाना की चाँद पर और क्या क्या नये शोध चल रहे हैं और क्या शोध हो चुके है.

 

उम्मीद है की आप को आज की यह पोस्ट अच्छी लगी होगी अगर आप को इस पोस्ट से कुछ भी नया सिखने को मिला हो तो हमे कमेंट कर के जरुर बताएं और इस पोस्ट को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजे मिलते है अगली पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार !

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