Isro Mission | अंतरीक्ष में फैले कचरे से निपटने के लिए मेगा प्लान

अंतरीक्ष में इसरो ने उठाया बड़ा कदम

Isro Mission अंतरीक्ष की दुनिया में भारत न केवल आत्म निर्भर बन रहा है बल्कि इसरो अब पूरी जिम्मेदारी से बहुत तेज़ी से आगे बड रहा है कोरोना काल में इसरो ने उस मिशन में गे बड़ने का फैसला किया है जो आने वाले समय में अंतरीक्ष में भारत के setellites को किसी भी सूरत में बर्बाद नहीं होने देगा. इसरो मिशन 

 

अंतरीक्ष में फैले कचरे से निपटने के लिए मेगा प्लान

Isro Mission पृथ्वी की नीचली कक्षा में 25 से 28 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चक्कर काट रहे मानव निर्मित अंतरीक्ष मलबा बड़ता ही जा रहा है जो भारत के setellites समेत कई अंतरीक्ष में मौजूद भारत के उपकरणों को भारी नुकसान पंहुचा सकता है.

 

लेकिन अब भारतीय अंतरीक्ष अनुसन्धान संगठन यानि इसरो और आर्य भट्ट रक्क्षेपन विज्ञानं शोध सस्थान यानि एरीज़ ने मिल कर इसका समाधान निकलने की ठानी है.

 

इसरो के मुताबिक मानव निर्मित अंतरीक्ष मलबे में लगातार बडोत्तरी हो रही है जो हमारे setellites के लिए बड़ा खतरा बन गया है क्यू की भारत के ज्यादातर उपग्रह इस्सी कक्षा के मौजूद हैं.

 

Isro Mission इसरो की 50 से ज्यादा Communication nevigation और निगरानी उपग्रह पृथ्वी की नीचली कक्षा में Operation हैं जिनपर ये मलबा एक खतरे की तरह मंडराता रहता है साथ ही ये Future space missionके लिए भी बड़ा खतरा बना हुआ है.

 

कई बार मिशन lonch करते समय आखिरी समय में lonching को कुछ मिनटों के लिए टालना पड़ा इसरो इस मामले में यानि की अंतरीक्ष मलबे की ट्रेकिंग के लिए अमेरिका American Aerospace Defense command पर निर्भर है जो इस तरह के मलबे को ट्रैक करती है .

 

भारत बना चूका है ट्रैकिंग का नेटवर्क

Isro Mission अंतरीक्ष की दुनिया में इसरो आत्मनिर्भर होता जा रहा है space projects को सुरछा प्रदान करने के लिए टेलिस्कोप और राडार का एक नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है.

 

इस project के मुताबिक देश के चारो कोनो में दूरबीन और राडार स्थापित किये जायेंगे ताकि अंतरीक्ष मलबे की ट्रेकिंग का सटीक डाटा realtime में मिल सके.

 

बंगलोर में इसी सिलसिले में पिछले साल Space Situation control स्थापित किया गया था बंगलोर में स्थापित अत्याधिक Multi object टैकिंग radar भी इसी परियोगना का हिस्सा है.

 

तुरुवंत पुरम के पुमुड़ी और राजस्थान के माउन्ट आबू में भी एक एक टेली स्कोप स्थापित की जाएगी इसके आलावा एक एडिसनल radar उत्तर भारत में किया जाएगा.

 

ओप्टिकल टेली स्कोप से निगरानी

इसरो ने ईस्ट के बीच में करार के मुताबिक दोनों संस्थाए मिल कर ऑप्टिकल टेली स्कोप अवलोकन सुविता केंद्र स्थापित करेंगे जिससे पृथ्वी की निकट कक्षा में चक्कर काट रहे अंतरीक्ष मलबे को ट्रैक किया जा सकेगा.

 

इसके आलावा दोनों संगठन अंतरीक्ष मौसम खगोल भोतिकी और पृथ्वी की निचली कक्षा का मिल कर अध्यन करेंगे देश के पहले मानव अंतरीक्ष मिशन यानि गगन यान के लिए भी ये बहुत जरुरी है.

 

अंतरीक्ष में कितना कचरा मौजूद है

NASA स्पेस के सभी महत्वपूर्ण बड़े टुकडो को टैक करती है और ISS के साथ ही दुसरे setellites के टकराने के खतरे की भविष्वाणी करती है NASA ने 10 सेंटीमीटर से ज्यादा बड़े 23 हज़ार टुकडो को ट्रैक किया है.

 

जिनमे से 10 हजार टुकडो को अंतरीक्ष कचरा बताया गया है वहीं यूरोपी अंतरीक्ष एजेंसी भी ये काम करती है अंतरीक्ष के कचरे से निपटने के लिए ब्रिटेन एक डेमो मिशन की सुरुआत कर चूका है.

 

इस मिशन में एक छोटा उपग्रह अंतरीक्ष के मलबे को कैप्चर और ट्रैक करने का काम कर रहा है इस उपग्रह को अंतरीक्ष के कचरे को हटाने के लिए ISS पर तैनात किया गया है.

 

अंतरीक्ष में कचरे की बात करे तो पृथ्वी की निचली कक्षाओ में करीब 6 हजार टन मलबा, 25 से 28 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चक्कर लगा रहा है.

 

बड़ी बात तो यह है की एंटी setellites उपग्रहों के परीक्षण से बड़ी मात्रा में अंतरीक्क्षिय कचरा पैदा होता है फ़िलहाल पुरे कचरे में 34 फीसदी अमेरिका का है जबकि भारत का केवल 1 फीसदी ही है.

 

अंतिरक्ष में भारत के केवल 206 मलबे टुकड़े अंतरीक्ष में तैर रहे है भारत से करीब 20 गुना ज्यादा कचरा चीन का है उसके 4 हजार टुकड़े अंतरीक्ष में तैर रहे है.

 

अंतरीक्ष में कचरे से कितने खतरा

अंतरीक्ष में मौजूद मलबे के खतरनाक होने का सबसे बड़ा कारण इनकी रफ़्तार है ये टुकड़े बहुत तेज़ रफ़्तार से चक्कर लगा रहे है पृथ्वी की निचली कक्षा में जहा भारतीय उपग्रह पर परिक्षण किया गया वहाँ  वस्तुवे अपनी कक्षाओ में रहने के लिए आम तौर पर लगभग 8 मीटर प्रति सेकेंड या 28 हजार किलो मीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चलती है.

 

इतनी रफ़्तार में करीब 100 ग्राम की एक छोटी वस्तु भी टकराने पर उतना ही प्रभाव पैदा करेगी जितना की लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने वाला 30 किलो का पत्थर टकराने पर करता है.

 

नस्ट किये गए भारतीय उपग्रह से निकलने वाला मलबा आम तौर पर इतनी ही रफ़्तार से आगे बड़ेगा अगर इससे नस्ट नही किया गया तो अंतरीक्ष में किसी भी अन्य उपग्रह से टकराने पर वो उस उपग्रह को बेकार कर सकता है.

 

अंतरीक्ष में फैले कचरे से निपटने के लिए मेगा प्लान  हेल्लो दोस्तों आज आप ने इस पोस्ट के माध्यम से जाना की अंतरीक्ष में फैले कचरे से निपटने के लिए हमारी स्पेस एजेंसी इसरो क्या बड़े कदम उठाने जा रही है उम्मीद करता हु की आप लोगो को पूरी बात आसान भाषा में समझ आ गया होगा.

 

अगर आप लोगो को हमारा aaj का यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो कमेंट कर के जरुर बताये और हमे सोसल लिंक के माध्यम से फोलो जरुर करे मिलते है अगले पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार !

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