Mangal Grah Per Kheti मंगलग्रह पर खेती करने का मिशन | NASA

Mangal Grah Per Kheti  धरती से बाहर भी एक धरती हो जहा आने वाले समय में हम इंसान बस सकें और इस सपने को जमीन देने के लिए वैज्ञानिक सालों से मेहनत कर रहे हैं कभी चंद्रमा पर तो कभी मंगल पर भविष्य में इंसानी बस्तियां बसाने की बातें लम्बे वक्त से चल रहीं हैं.

 

अमेरिका की अंतरीक्ष में काम करने वाली कम्पनी NASA ने मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने के लिए योजना तय कर ली है अगर सबकुछ येजना के मुताबिक रहा तो जल्द ही मंगल ग्रह पर इंसान बसने लगेंगे|

 

मंगलग्रह पर इंशानो को बसाने की तयारी

Mangal Grah Per Kheti  अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA एक छोटा निउक्लियर रिएक्टर विकषित करने की कोशिस कर रहा है अगर यह कोशिस सफल रहती है तो मंगल पर जीवन बसाने की दिशा में आखिरी तकनिकी बाधा भी ख़त्म हो जायेगी.

 

मंगल पर पानी की खोज होने के बाद अब अंतरिक्ष वैज्ञानिको का सबसे प्रमुख मक्सद वहा उर्जा पैदा करना था उर्जा से भी ज्यादा जरुरी बात है खाने का इंतजाम करना अगर मंगल गृह पर खेती हो सकेगी तभी तभी वहा इंसान जिन्दा रह सकेगा.

 

वैज्ञानिक इसको ले कर काफी दिन से रिसर्च में लगे थे की क्या मंगल ग्रह पर खेती हो सकेगी क्या, वहा पर धरती से पेड़ पौधों के बीज ले जाये तो क्या वो मंगल के तापमान में सही सलामत रह पायेंगे या नहीं,

 

तो दोस्तों अब इसको ले कर वैज्ञानिको ने बड़ा खुलासा किया है वैज्ञानिको की माने तो अब ये कोशिस रंग लाइ है की अब मंगल पर भी सलाद उगाया जा सकेगा|

 

  • मंगल गृह पर भी हो सकती है खेती
  • मंगल पर कर सकेंगे सलाद की खेती
  • वैज्ञानिको की खोज से जुडी उम्मीदें

 

मंगल गृह पर भी हो सकती है खेती

Mangal Grah Per Kheti  अब वैज्ञानिको ने ऐसी खोज की है की इंसान केवल मंगल गृह रह ही नहीं सकेगा बल्कि वो वहा पर खेती कर सलाद के पौधों को भी उगा सकेगा और सलाद ही नहीं बाकी सारी सब्जियां भी उगने की पूरी उम्मीद है.

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दरअसल कई साल पहले ब्रिटिस एस्ट्रोनोट्स टिम पी के साथ करीब 2 किलो रोकेट बीज इंटरनेशनल स्पेस स्टेसन  गई थी 6 महीने बाद पृथ्वी पर लौटे इन बीजों को देश में 6 लाख बच्चो ने उगाया और पाया की अंकुर टूटने में थोड़ी देरी लगी लेकिन फिर ये तेज़ी से बढे.

 

Mangal Grah Per Kheti  वैज्ञानिको की माने तो रोकेट बीज के तेज़ी से बड़ने के पीछे कॉस्मिक रेंज से निकला रेडिएसन प्रोटोन और सोलर एनर्जी पार्टिकल्स थे हाला की वैज्ञानिक ये भी कह रहे है की मंगल पर रेडिएसन बीज (ISS) यानि  इंटरनेशनल स्पेस स्टेसन के मुकाबले कम से कम 5 गुना ज्यादा होगा.

 

ऐसे में ये बीज अगर रेडिएसन को सह लेते हैं तो मंगल पर सलाद उगाना आसान होगा और ज्यादा सुरक्षित रखने पर मंगल पर खुद का उगाया हुआ सलाद खाने की उम्मीद की जा सकती है.

 

इस प्रोजेक्ट में 8,600 स्कूलों के 6 लाख बच्चो ने हिस्सा लिया था और ISS से लाये गए रोकेट बीज का ख्याल रखा था|

 

मंगल पर कर सकेंगे सलाद की खेती

मार्च में NASA ने दावा किया था की ISS पर उगाई सलाद में धरती पर उगाये गये सलाद के मुकाबले ज्यादा पोषण होता है ऐसे में अब वैज्ञानिको को लगने लगा है की केवल मंगल ही नहीं कम ग्रेविटी वाले सभी ग्रहों पर कम से कम वो सलाद की खेती तो कर ही सकते हैं.

 

लेकिन अगर सलाद की खेती मंगल पर हो सकती है तो फिर बाकी सब्जियां भी  उगाई जा सकेंगी हलाकि अभी तक NASA ने केवल सलाद के बीजों पर ही प्रयोग किया है आगे ऐसा भी हो सकता है की बाकी सब्जियों के बीजों को भी अंतरिक्ष में ले जा कर उसपर रिसर्च की जा सके.

 

दोस्तों आप लोगो को शायद नहीं पता वैज्ञानिको ने कुछ साल पहले ही चाँद और मंगल के सतह की मिट्टी धरती पर बना ली थी इस मिटटी में वैज्ञानिको ने सब्ज़ी भी उगाई दरअसल NASA के वैज्ञानिको ने मंगल और चंद्रमा जैसा वातावरण ने मिट्टी तैयार कर उसमे फसलें उगाने में सफलता पाई थी.

 

इस प्रयोग के बाद वैज्ञानिको का कहना था की मंगल और चंद्रमा पर भी फसल उगाई जा सकती है वैज्ञानिको ने 10 अलग अलग किस्म की फसलों की खेती की जिसमे बगीचे के पौधे, टमाटर, मूली, गाजर, पालक और मटर सामिल हैं|

 

वैज्ञानिको की खोज से जुडी उम्मीदें

NASA के सहयोग से नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी के शोध कर्ताओं ने इस काम को अंजाम दिया उन्होंने बताया की मंगल और चंद्रमा की मिटटी पर उगाई गयी फ़सल से बीज भी प्राप्त कर लिए गये हैं ताकि फिर से नई फसल उगाई जा सके.

 

वैज्ञानिको ने मंगल गृह और चंद्रमा के सतह के उपरी आवरण से ली गयी मिट्टी में सामान्य मिटटी में मिला कर क्रित्तिम रूप से उसके आवरण का वातावरण विकशित किया था और और इसमें 10 फसलों में से 9 फसले अच्छी तरह विकशित हुई थीं.

 

ये रिसर्च ओपन एग्रीकल्चर जरनल में प्रकाशित हुई थी वैज्ञानिको की माने तो इन फसलों को खाया भी जा सकता है वैज्ञानिको ने चाँद और मंगल पर इंशानी बस्तियां बनाने की तरफ भी छलांग लगाई है.

 

पहले मिटटी भी बनाई और अब वैज्ञानिक अंतरीक्ष में रखे गये सलाद के बीजों को भी लगा कर सलाद बना चुके हैं यानि अब बहुत जल्द ही इंशान चाँद या मंगल पर अपनी बस्तिया बसा लेगा|

 

मंगल पर ऊँची ऊँची इमारते बनाने का मिशन

दरअसल NASA के वैज्ञानिक पिछले काफी सालों से मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने के मिशन पर लगे हुए हैं मंगल या चाँद पर अगर इंशान बसता है तो क्या वहा भी पृथ्वी जैसी ऊँची ऊँची इमारते बनेंगी क्या  वहा के वातावरण के हिसाब से ऐसी इमारते बन सकती हैं.

 

इसका जवाब मिला 2018 में दरअसल ब्रिटिस के अर्केटेक्ट नॉर्मन होस्तेर दुनिया में अपने बेहतरीन डिज़ाइन के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनकी एक कम्पनी Foster Partners अब चंद्रमा और मंगल पर बस्तियों के डिज़ाइन की ओर कदम बढ़ा रही हैं.

 

इंग्लैंड की चाचेस्टर में 12 से 15 जुलाई 2018 के बीच आयोजित किये गये फ़ूड फ़ूड फेस्टिवल के अनुसार अंतरीक्ष में स्थापित होने वाली इन  बस्तियों की झलक दिखाई गयी वर्चुअल रियलिटी के जरिये लोगो को बस्तियों में वोक करने का अहसास भी करवाया गया.

 

कैसी होंगी वो बस्तियां जो धरती से दूर मंगल या चाँद पर बसाई जायेंगी और कैसे उन्हें तैयार किया जायेगा जैसे माना जा रहा है की नासा 2023 में इंसानों को मंगल में पर भेजेगा इसके बाद वह पर रिसर्च करने के बाद अमेरिका वहा पर इंसानी बस्ती बसाने की कोशिस पर लग सकता है.

 

हलाकि ये आसान नहीं है क्यों की मंगल गृह की पृथ्वी से दूरी कम से कम 5 करोड़ किलोमीटर है इस लिए एक बार में वहा सामान ले जाने में 9 से 10 महीने का समय लगता है और अगर वहा इंसानी बस्ती बसानी है या फिर खेती करनी है.

 

तो उसमे कम से कम 20 से 30 साल और लगेंगे तो मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने से पहले इंसानो को एक ऐसा रोकेट तैयार करना होगा जो कम से कम समय में इंसानों को मंगल तक पंहुचा दे तभी ये सपना पूरा हो पायेगा .

 

NASA मंगलग्रह पर खेती करने का मिशन दोस्तों आज के हमारे इस लेख के जरिये आप लोगो को यह बताया गया है की नाशा की स्पेस एजेंसी चाँद और मंगल पर इंशानी बस्ती बनाने के बारे में क्या क्या काम कर रही है.

 

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