Raksha Bandhan रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और क्या है इसके पीछे की कहानी

Raksha Bandhan रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है और क्या है इसके पीछे की कहानी

Raksha Bandhan रक्षाबंधन एक हिन्दू और जैन त्यौहार है वैसे देखा जाए तो Raksha Bandhan रक्षाबंधन किसी धर्म विशेष से जुड़ा हुआ नहीं है क्युकी यह त्यौहार भाई और बहन के प्यार का त्यौहार है और इसीलिए इसे सभी धर्मो के लोग संपूर्ण भारत में औरे जोश उत्साह के साथ प्रेम के साथ मनाते हैं.

सबसे पहले दोस्तों आप को और आप के परिवार को हमारे Gyan News की तरफ रक्षाबंधन की ढेर सारी बधाई !

क्युकी ये किसी धर्म विशेस का त्यौहार नहीं है ये तो भाई बहन का त्यौहार है तो Raksha Bandhan रक्षा बंधन श्रावण मास में मनाया जाता है श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन यह त्यौहार मनाया जाता है क्युकी ये श्रावण मास में मनाया जाता है इस लिए इसे श्रावण श्रावणी भी कहते हैं.

 

Raksha Bandhan रक्षाबंधन में राखी यानि रक्षा सूत्र को सबसे अहम् माना जाता है तो दोस्तों आज हम आप लोगो को इस लेख के माध्यम के जरिये Raksha Bandhan रक्षाबंधन कैसे सुरु हुआ Raksha Bandhan रक्षाबंधन की पुराणिक कहानी क्या है यही जानकरी बताने जा रहे हैं इसके आलावा Raksha Bandhan रक्षाबंधन  कैसे मनाया जाता है ये जानकारी भी हम आप को बतायेंगे|

 

Raksha Bandhan रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है इसके पीछे की कहानी क्या है

दोस्तों यह बहुत समय पहले की बात है एक बार देवताओ और असुरो के बीच में भयानक युद्ध चल रहा था दोनों में बराबर की टक्कर थी न देवता पीछे हटें और न असुर पीछे हटें, तो ये युद्ध लगातार 12 वर्षो तक चलता रहा लेकिन इसका कोई निर्णय नहीं हो पा रहा था.

 

तो अंत में असुरो ने देवताओ पर विजय प्राप्त कर ली और देवराज इंद्र के सिंघासन सहित तीनो लोको को जीत लिया अब तीनो लोको पर असुरों का राज था और हारे हुए इंद्र देवताओ के गुरु ब्रहस्पति के पास गये.

 

और उनसे सलाह मांगी की अब क्या करे हम सभी तो बुरी तरह से हार चुके हैं तब ब्रहस्पति ने उन्हें मन्त्र उच्चारण के साथ रक्षा धान करने के लिए कहा ब्रहस्पति ने उन्हें बताया की श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा विधान का संस्कार प्रारंभ करो.

 

और इस रक्षा विधान के दौरान मन्त्र उच्चार से उन्होंने एक रक्षा पोटली तैयार की और उस रक्षा पोटली को मंत्रो से मजबूत किया पूजा के पश्चात इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी सची जिन्हें इन्द्रनी भी कहा जाता है.

 

इन्द्रनी ने इस रक्षा पोटली को देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बाँध दिया और फिर देवराज इंद्र असुरो पर आक्रमण किया और फिर इस रक्षा पोटली की शक्ति से उन्होंने असुरो को हरा दिया और अपना खोया हुआ राज्य तीनो लोक प्राप्त कर लिए,

 

वर्तमान में ये त्यौहार भाई बहन के प्यार का पर्यावाची बन चूका है कहते हैं की Raksha Bandhan रक्षाबंधन  भाई बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करता है एक ओर जहा भाई बहन के प्रति अपने दाइत्व को निभाने का वचन देता है वही दूसरी ओर बहन भी भाई की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है.

 

इस दिन भाई की कलाई पर बहन राखी बंधती है वो सिर्फ रेसम की डोर नहीं होती है बल्कि वो एक अति पवित्र रक्षा सूत्र होता है जो भाई बहन के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन होता है रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नज़र आने वाले धागे में मौजूद होती है|

 

 

Raksha Bandhan रक्षाबंधन  क्यों मनाया जाता है इसके पीछे की दूसरी कहानी

एक बार भगवान श्री कृष्ण के हाथ में चोट लग गयी खून निकलने लगा खून की धारा बहने लगी उस समय द्रोपती वहा मौजूद थी द्रोपती से ये देखा नहीं गया उसने तत्काल अपने साड़ी का पल्लू फाड़ा और भगवान् श्री कृष्ण के हाथ में बांध दिया.

 

जैसे ही उन्होंने रक्षा सूत्र बाँधा खून बहना बंद हो गया तब भगवान् शिर कृष्ण ने इस रक्षा सूत्र का कर्ज चुकाने के लिए जब दुसासन के द्वारा द्रोपती का चीर हरण किया गया तब श्री कृष्ण भगवान् ने द्रोपती का चीर बढ़ा कर इस बंधन का उपकार चुकाया और वही से रक्षा सूत्र बंधने की परम्परा चली आ रही है जिसे आज हम Raksha Bandhan रक्षाबंधन  के रूप में जानते हैं|

 

Raksha Bandhan रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है इसके पीछे की तीसरी कहानी

एक बार राजा बली रसातल में चला गया और तब बली को महसूस हुआ की भगवान को तो मेरे, यहाँ पर होना चाहिए और तब बली ने हजारो वर्षो तक भगवान् विष्णु की तपस्या की, और जब भगवान् प्रसन्न हुए तो उन्होंने भगवान से दिन रात अपने सामने रहने का वचन ले लिया.

 

इसके बाद भगवान् विष्णु वचनों में बंध गये और उन्हें बली को ये वचन देना पढ़ा उसके बाद भगवान घर नहीं लौटे तो उधर लक्ष्मी माता परेशान हो गयी की भगवान् तो वरदान देने गए थे लेकिन अभी तक लौटे क्यों नहीं.

 

तभी लक्ष्मी माता ने नारद जी से पता किया भगवान् विष्णु वरदान देने के लिए गये थे और इतना समय हो गया लेकिन वो अभी तक लौटे नहीं तो नारद जी ने उन्हें बली के वरदान के बारे में बताया की वो अब घर नहीं लौट सकते.

 

तो भगवान् के घर न लौटने से माता लक्ष्मी परेशान हो गयीं तब नारद जी ने उन्हें एक उपाय बताया नारद जी ने कहा की आप राजा बली के पास जाओ पूर्णिमा के दिन और उन्हें रक्षा सूत्र बाँध कर उन्हें अपना भाई बना लो फिर माता लक्ष्मी ने बिलकुल वैसा ही किया.

 

और अपने पति भगवान् विष्णु को बली के यहाँ से ले कर अपने साथ आ गयीं और उस दिन श्रावण मैश की पूर्णिमा की तिथि थी और इस प्रकार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन बहने भाइयो को रक्षा सूत्र बंधना प्रारंभ कर दिया|

 

Raksha Bandhan रक्षाबंधन त्यौहार को कैसे मनाया जाता है

प्रातःकाल स्नान कर सभी बहने पूजा की थाली सजा लेती हैं वैसे तो आप सभी को ही ये चीज मालूम ही होगी लेकिन हमारे पोस्ट को पड़ने कुछ बाहर यानि out of india से आते हैं ये मै उनके लिए बता रहा हु.

 

थाली सजाने के बाद थाली में तरह तरह की रंग बिरंगी रखियो को रखा जाता है रोली और हल्दी रखी जाती है चावल, दीपक, मिठाई, और कुछ पैसे भी रखे होते हैं भाई राखी बंधवाने के लिए सुबह सुबह नहा धो कर नये कपडे पहन कर तैयार हो जाते हैं.

 

और फिर टिका करवाने के लिए पूजा या किसी उपयोक्त स्थान पर बैठते हैं या तो पूजा स्थल के आस पास बैठा जाता है या फिर किसी साफ सुथरी जगह पर बैठते है सबसे पहले घरो में बहने पूजा घर में पूजा करती हैं.

 

इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टिका किया जाता है बहने पुरे प्रेम प्यार भाव से भाइयो को टीका लगाती हैं हल्दी से या रोली से टीका लगाया जाता है और फिर उसी टीके के उपर चावल लगाया जाता है और साथ ही सिर पर थोड़े चावल छिडके जाते हैं.

 

फिर बहन अपने भाई की आरती उतारती है और फिर दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधी जाती है राखी भाई की पसंद की होती है हांलाकि आज कल तो बहनों के साथ भाई भी राखी खरीदने जाते हैं और फिर बहन पैसो को निछावर कर के उन पैसो को गरीबो में बाट देती है.

 

और फिर भाई अपनी समर्थन ने बहन को उपहार या धन देते हैं और इस प्रकार Raksha Bandhan रक्षाबंधन के अनुष्ठान को पूरा करने के पश्चात भाई बहन आपस में साथ बैठ कर भोजन करते हैं प्रतेक पर्व की तरह उपहारों और खाने पिने के लिए इस दिन विशेष पकवान बनाये जाते हैं.

 

आम तौर पर दोपहर का भोजन काफी महत्वपूर्ण होता है क्युकी Raksha Bandhan रक्षाबंधन दोपहर में ही मनाया जाता है तो इस तरह Raksha Bandhan रक्षाबंधन का अनुष्ठान पूरा किया जाता है Raksha Bandhan रक्षाबंधन  का अनुष्ठान पूरा होने तक बहनों के द्वारा व्रत रखने की परम्परा है|

 

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है हेल्लो दोस्तों उम्मीद है की आप लोगो को raksha bandhan से जुडी सभी जानकारी मिल गयी होगी की raksha bandhan कैसे मनाते हैं और raksha bandhan क्यों और कब से मनाया जाने लगा मिलते हैं अगली पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार !

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