रमजान क्यों मनाया जाता है और इसकी सच्चाई क्या है?

ramdan kyu manaya jata hai और इसकी सच्चाई क्या है? रमजान इस्लामी कैलेंडर का 9वा महिना है हालाकी इसको रमदान भी कहते है जिसमे हर साल इस्लामिक मान्यताओं के अनुशार इस महीने मुश्लिम समुदाय 29 या 30 दिनों के लिए रोज़ा रखते है.

दुनिया में किसी भी मुस्लिम समुदाय के लोगो से पूछो तो वह जरुर बता देगा की आखिर रमजान क्यों मनाई जाती है? लेकिन अगेर यही बात किसी और समुदाय के लोगो से पुचा जाए तो वह शायद न बता पाए की आखिर रमजान क्यों मनाई जाती है और इसका इतिहास क्या है.

भारत समेत दुनिया भर के मुश्लिम देशो में रमजान के पवित्र महीने में रोज़े रख कर बड़े ही धूम धाम से मनाई जाती है.

तो आइये दोस्तों जानते है की रमजान क्यों मनाई जाती है इसकी सुरुआत कहा से हुई और इसके इतिहास के बारे में,

 

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इस्लामी कैलेंडर

ramdan kyu manaya jata hai सबसे पहले जानते है इस्लामी कैलेंडर के बारे में, दोस्तों जैसा की आप लोग जानते है की हमारा साल जनवरी से सुरु हो कर दिसम्बर में ख़त्म हो जाता है और यह 12 माह का होता है, इसी प्रकार इस्लामी कैलेंडर भी होता है जो की मुहरम से सुरु हो कर जु अल-हिज्जा में ख़त्म हो जाता है तो आइये जानते है इस्लामी कैलेंडर के पुरे 12 नमो के बारे में.

  1. मुहरम
  2. सफ़र
  3. रबी अल-अव्वल
  4. रबी अल-थानी
  5. जमाद अल-अव्वल
  6. जमाद अल-थानी
  7. रज्जब
  8. शआबान
  9. रमजान
  10. शव्वाल
  11. जु अल-कादा
  12. जु अल-हज्जा

 

रमजान क्या है?

रमजान इस्लामी कैलेंडर का 9वा महिना है हालाकी इसको रमदान भी कहते है जिसमे हर साल इस्लामिक मान्यताओं के अनुशार इस महीने मुश्लिम समुदाय 29 या 30 दिनों के लिए रोज़ा रखते है.

ramdan kyu manaya jata hai रमजान के महीने को इबादत का महीना कहा जाता है कहा जाता है की इस समय जो भी इन्शान अल्लाह को दिल से याद करता है उसकी हर एक ख्वाहिश पूरी होती है

हलाकि वह धार्मिक लोग जिनकी इस रमजान महीने में तबियत ख़राब हो जाती है,गर्भावस्था में होने तथा अन्य परेशानियों की वजह से कोई रोज़ा रखने में असमर्थ होता है तो उनको रोज़ा न रखने की अनुमति होती है.

 

 रमजान क्यों मानते है ?

इस्लाम में रमजान के महीने को सबसे पाक महीना माना जाता है. और यह भी माना जाता है की रमजान के महीने में जन्नत का दरवाज़ा खुल जाता है यह भी कहा जाता है की अल्लाह रोज़ा रखने वाले इन्शान की दुआ को कुबूल करता है और इस पवित्र महीने में गुनाहों से रिहायत मिलती है.

मुसलमानों के लिए यह रमजान का महीना इस लिए भी खास होता है क्युकी इन्ही दिनों पैगम्बर हज़रात मोहम्मद साहब के जरिये अल्लाह की अहम् किताब कुरान शरीफ ( नाज़िल ) जमीन पर उतरी थी.

इसलिए इन दिनों मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा तर अपना समय इबादत करना, नमाज़ पड़ना,और कुरान पड़ने में गुजरते है.

 

रमजान कैसे मनाया जाता है?

रमजान के महीने में मुश्लिम दिन भर न भोजन करता है और न ही पानी पिता है और सभी बुरी आदतों का त्याग कर देता है जैसे बीडी, सिगरेट, गुटका, पान मसाला, चैनी इत्यादि.

जो भी मुश्लिम रोज़ा रखता है वह सुबह सूर्य उदय होने से पहले थोडा बहोत नास्ता कर सकता है और दिन भर कुछ भी नहीं खा सकता और न ही पानी पी सकता है इस पूरी प्रक्रिया को सुहूर (सेहरी ) अथवा इफ्तार  नाम से भी जाना जाता है.

रमजान का यह महिना ईद उल फितर से समाप्त होता है जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है मुश्लिम समुदाय के लोगो का यह दिन हर्षोल्लास का होता है इस दिन सभी मुश्लिम नये कपडे पहन कर अपने सगे संबंधियों के घर ईद मिलने जाते है और एक दुसरे से गले लग कर बधाई देते है.

 

रमजान का इतिहास

रमजान के इस महीने को सब ए अतर कहा जाता है मान्यता यह भी है की अल्लाह ने अपने बन्दों को कुरान सरीफ से नवाज़ा था इस लिए इस महीने को पवित्र माना जाता है और अल्लाह के लिए रोज़ा अदा किया जाता है जिसे मुश्लिम समुदाय के सभी परिवार वाले छोटे बड़े सभी सदस्य मिल कर निभाते है.

रमजान में जो रोज़ा किया जाता है उसे अल्लाह की इबादत कहा जाता है इस्लाम धर्म के मुताबिक मुसलमान का मतलब (मुसल ए इमान) होता है यानि जिसका इमान पक्का हो जिसके लिए उन्हें कुछ निय्स्मो को समय के साथ पूरा करना होता है तभी वह असल मायने में मुसलमान कहलाते है.

अल्लाह के अस्तित्व में यकीं करना, नमाज़ अदा करना, रोज़ा, ज़काद, हज ये सभी दाइत्व निभाने के बाद ही इस्लाम के अनुसार वह व्यक्ति असल मुसलमान कहलाता है.

सिर्फ इतना ही नहीं रमजान के नियम बहोत ही कठिन होते है कहा जाता है की इससे अल्लाह और इन्शान की बिच की दुरी कम होती है रमजान में इन्शान के अंदर धर्म के प्रति भावना बदती है अल्लाह पर विश्वाश पक्का होता है और एकता की भावना बढती है.

रमजान में रोज़ा रखा जाता है जिसमे अल्लाह का नाम लिया जाता है और नमाज़ अदा की जाती है और साथ ही कलम भी पड़ा जाता है रमजान में गलत आदतों से दूर रखने के साथ साथ निगरानी भी राखी जाती है.

रमजान के दिनों में किसी भी तरह की लड़ाई को गलत माना जाता है रमजान में दान करने का भी एक अलग महत्त्व है सभी को अपनी श्रधा औरआर्थिक स्थिति के अनुसार नेक कार्य करना होता है .

रमजान में लोगो को उनके गुनाह माने को कहा जाता है जिससे वह अपनी गलतियों के लिए छमा मांग सके जिससे की उनके दिल का भर कम होता है और अगर वो अपनी गलती को छुपाता है तो उससे उस बात क एह्शाश होता है और वो आगे से एसा नहीं करता है|

 

रमजान का महत्त्व

रमजान लोगो में प्रेम और अल्लाह के प्रति विश्वास जगाने के लिए मनाया जाता है धार्मिक निति से लोगो को गलत कामो से दूर रखा जाता है दान का भी विशेष महत्त्व होता है जिसे जकात कहते है गरीबो में जकात देना जरुरी होता है साथ ही ईद के दिन इदी दे जाती है यह भी एक प्रकार का दान ही होता है .

दोस्तों आप लोगो को हमारा यह लेख रमजान क्यों मनाया जाता है कैसा लगा आप हमें कमेंट कर के जरुर बताये और अगेर यह लेख में किसी प्रकार की कोई गलती हो तो मुझे माफ़ करे और अगेर आप लोगो को लगता है की आप मुझे कोई सुझाव देना चाहते है तो कमेंट करे अथवा हमारे सोसल लिंक कर जा कर हमें फ़ॉलो करे और वहा पर आ कर हमसे सवाल करे हम जवाब जरुर देंगे |

 

आज के इस लेख से अपने क्या सीखा 

दोस्तों आज के इस लेख से अपने यह सीखा की रमजान क्या है रमजान क्यों मनाया जाता है रमजान का इतिहास क्या है इसके साथ ही अपने यह सीखा की रमजान का महत्त्व क्या है 

उम्मीद है की आपको हमारे द्वारा लिखी गयी यह पोस्ट पसंद आई होगी और आपको हमसे कुछ नया जरुर सिखने को मिला होगा और अगर आपको हमारे इस आर्टिकल से कुछ नया सिखने मिला है तो आप हमे कमेंट करके जरुर बतायें हम मिलते हैं आपसे अगली पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार |

 

7 thoughts on “रमजान क्यों मनाया जाता है और इसकी सच्चाई क्या है?”

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  4. bahut hi badiya or artical hain sir, maine bhi aap ka artical padhkar usse sikh kar maine bhi ramzan par or ramzan ki roze par likha hain, thanks sir ji great content

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    • आप हमसे सीखें,, और हम आपसे सीखें यही तो हमारी वेबसाइट का मकसद है| हमारा आर्टिकल पड़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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  5. आपने बहुत बढ़िया तरीके से व्याख्या किया है । आज बहुट कुछ सीखने को मिला । सादर धन्यवाद!

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    • आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद की आप अपना कीमती वक्त निकाल कर हमारे ब्लॉग को पड़ने आये हैं

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